भारतीय काव्यशास्त्र एवं पाश्चात्य साहित्य-चिन्तन
by मिश्र, सभापति
[ BOOKS ] , Bharatiya sahitya chintan Edition statement:4th ed. Published by : Jaybharati Prakashan, (Ilahabad;) Physical details: 616 p. : 320 cm ISBN:8185957398. Year: 2019 Item type: BOOKS| Home library | Call number | Status | Date due | Barcode | Item holds |
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AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
Contact: Ankushe Sheetal Suresh, ( BSc Chemistry), MLISc, SET, NET
Librarian,
Arihant College of Arts Commerce And Science,
Pune Camp, Pune-01
Ph. No. 02067270906
E-mail: ac.library@arihantacs.edu.in
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Available | 5998 | |||
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Available | 5997 |
प्रस्तुत पुस्तक ‘भारतीय काव्यशास्त्र एवं पाश्चात्य साहित्य चिन्तन’ डॉ. सभापति मिश्र द्वारा लिखित है, जो जयभारती प्रकाशन, इलाहाबाद द्वारा चतुर्थ संस्करण के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है। इस पाठ्यपुस्तक में काव्यशास्त्र प्राचीन ज्ञाशशाखा है जो अद्यतन प्रवाहित है। इस शास्त्र की एक सुंदीर्घ परम्परा रही है जिसका प्रवर्तन आचार्य भरतमुनि के 'नाट्यशास्त्र' में दृष्टिगोचर होता है। इसी प्रकार अरस्तू ने 'पोइटिक्स' में काव्यशास्त्र के सिद्धान्तों का निरूपण किया है। काव्यशास्त्र का प्रमुख उद्देश्य काव्य के तत्त्वों का विवेचन करना एवं काव्य के स्वरूप का निरूपण करना है। काव्यशास्त्र में अमिधा, लक्षणा और व्यंजना तीन शब्दशक्तियाँ मानी गयी हैं। काव्य सर्जन महाकाव्य, खण्डकाव्य, गीतिकाव्य आदि रूपों में होता है। काव्यशास्त्र के अन्तर्गत विविध काव्यभेदों के सिद्धान्त निरूपित किये गये हैं। काव्यभेदों के स्नान गद्य के भी भेद हैं। प्रस्तुत पुस्तक में भारतीय काव्यशास्त्र के साथ-साथ पाश्चात्य साहित्य-चिन्तन का विवेचन किया गया है।

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