|
|
61.
|
|
मैत्र
by देशपांडे, पु. ल.
Publication:
Pune:
मौज प्रकाशन गृह,
1990
. 199 p. :
21 cm
Date:
1990
Availability:
Items available:
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
(1),
|
|
|
62.
|
|
कोसला
by नेमाडे, भालचंद्र.
Publication:
Pune:
Popular prakashan,
2014
. 326 p. :
19 cm
Date:
2014
Availability:
Items available:
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
[891.4637 NEM]
(1),
|
|
|
63.
|
|
बाजार
by माडगूळकर, व्यंकटेश
Publication:
Pune:
मेहता पब्लिशिंग हाऊस,
2018
. 108 p.:
20 cm
Date:
2018
Availability:
No items available:
|
|
|
64.
|
|
गोदान
by प्रेमचंद
Publication:
New Delhi:
maple hindi,
2023
. 392 p.:
23 cm
Date:
2023
Availability:
Items available:
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
(1),
|
|
|
65.
|
|
कमला
by जोशी, गीतांजली अविनाश
Publication:
Los Anjelis :
SAGE Publications India Pvt. Ltd.,
2018
. 131 p. :
, ना. सी. फडके आणि कमल दीक्षित हि मराठी साहित्यविश्वात गाजलेली प्रेमकहाणी. या प्रेमकहाणीची नायिका हे एक वादळी व्यक्तिमत्व. या 'कमला' चं आयुष्य शब्दबद्ध करण हे तसं आव्हानात्मकच. मात्र लेखिकेनं अत्यंत प्रांजळपणे, तटस्थ वृत्तीनं आणि संयत शब्दांमध्ये ते रेखाटलं आहे . आपल्या साहित्यिक आईवडिलांच्या आयुष्यच केलेला त्रिमितीय चित्रण मराठी वाचकांना खचितच आवडेल ययाती शंका नाही.
21 cm
Date:
2018
Availability:
Items available:
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
(1),
|
|
|
66.
|
|
कबीर :
कबीर के व्यक्तित्व, साहित्य और दार्शनिक विचारो कि आलोचना
by द्विवेदी , हजारीप्रसाद.
Publication:
New Delhi:
Rajkamal Prakashan,
2020
. 280 p. :
, ‘‘कबीर धर्मगुरु थे। इसलिए उनकी वाणियों का आध्यात्मिक रस ही आस्वाद्य होना चाहिए, परंतु विद्वानों ने नाना रूप में उन वाणियों का अध्ययन और उपयोग किया है। काव्य-रूप में उसे आस्वादन करने की प्रथा ही चल पड़ी है, समाज-सुधारक के रूप में, सर्वधर्म-समन्वयकारी के रूप में, हिंदू मुस्लिम ऐक्य-विधायक के रूप में, विशेष संप्रदाय के प्रतिष्ठाता के रूप में और वेदांत-व्याख्याता दार्शनिक के रूप में भी उनकी चर्चा कम नहीं हुई है। यों तो ‘हरि अनंत हरि कथा अनंता, विविध भाँति गावहिं श्रुति-संता’ के अनुसार कबीर-कथित हरि-कथा का विविध रूपों में उपयोग होना स्वाभाविक ही है, पर कभी-कभी उत्साह-परायण विद्वान् गलती से कबीर को इन्हीं रूपों में किसी एक का प्रतिनिधि समझकर ऐसी-ऐसी बातें करने लगते हैं जो असंगत कही जा सकती हैं।’’ आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी पहले विद्वान हैं, जिन्होंने इस प्रकार के एकांगी दृष्टिकोण से बचकर कबीर के बहुमुखी व्यक्तित्व एवं कृतित्व का समग्र रूप में संतुलित और सम्यक् मूल्यांकन किया है। उनका मत है कि कबीरदास में इन सभी रूपों का समन्वय था, किंतु उनका वास्तविक रूप भक्त का ही था और अन्य सारे रूपों को उन्होंने भक्ति के साधन के रूप में स्वीकार किया था। आचार्य द्विवेदी की प्रस्तुत कृति आज भी कबीर विषयक आलोचना-साहित्य में अद्वितीय मानी जाती है और कबीरदास के व्यक्तित्व तथा कृतित्व को समग्र रूप में हृदयंगम करने के लिए यह अकेली पुस्तक पर्याप्त है, ऐसा विद्वानों का मत है। पुस्तक के अंत में उपयोगी समझकर ‘कबीर-वाणी’ नाम से कुछ चुने हुए पद्य संग्रह किए गए हैं। उनके शुरू के सौ पद आचार्य क्षितिमोहन सेन के संग्रह के हैं। इन्हीं को कविवर रवींद्रनाथ ठाकुर ने अंग्रेजी में अनूदित किया था।
20 cm.
Date:
2020
Availability:
Items available:
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
(2),
|
|
|
67.
|
|
ग़बन
by प्रेमचंद
Publication:
Delhi:
Manoj Prakashan,
2022
. 264 p.:
23 cm
Date:
2022
Availability:
Items available:
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
(1),
|
|
|
68.
|
|
शेष
by चांदोरकर, स्वाती
Publication:
मेहता पब्लिशिंग हाऊस
2018
Date:
2018
Availability:
Items available:
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
General Stacks
(1),
|