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हिंदी साहित्य का इतिहास
by नागेंद्र_संपादक
Publication:
New Delhi:
Mayur Books,
2021
. 870 p. :
, हिंदी साहित्य का इतिहास इस किताब में हिंदी साहित्य का भंडार पर्याप्त समृद्ध है। गद्य तथा पद्य की लगभग सभी विधाओं का प्रचुर मात्रा में साहित्य-सर्जन हुआ है। अनेक कालजयी कृतियाँ सामने आईं। लेखक-कवियों ने भी सर्जना के उच्च मानदंड स्थापित किए, जिन पर साहित्य-सृजन को कालबद्ध किया गया; वह युग उनके नामों से जाना गया। डॉ. नगेन्द्र ने गहन शोध और चिंतन के बाद हिंदी साहित्य के पूरे इतिहास पर विहंगम दृष्टि डाली है। इससे पहले भी हिंदी का इतिहास लिखा गया; पर डॉ. नगेन्द्र का ज्ञान विस्तृत फलक पर दिग्दर्शित है। इसमें आदिकाल यानी वीरगाथा काल का अपभ्रंश काव्य एवं देशभाषा काव्य के विवरण के बाद भक्तिकाल की ज्ञानमार्गी, प्रेममार्गी, रामभक्ति शाखा, कृष्णभक्ति शाखा तथा इस काल की अन्य रचनाओं को अपने अध्ययन का केंद्र बनाया है। इसके बाद के रीतिकाल के सभी लेखक-कवियों के साहित्य को इसमें समाहित किया है।
20 cm
Date:
2021
Availability:
Items available:
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
(2),
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5.
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हिंदी साहित्य का इतिहास
by शुक्ल, रामचंद्र
Publication:
Ilahabad:
Lokbharti Prakashan,
2019
. 535 p. :
20 cm
Date:
2019
Availability:
Items available:
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
(2),
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6.
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हिंदी साहित्य और भाषा
by भोसले, सदानंद_संपादक
Publication:
Nwe Delhi;
Rajakamal Prakashan,
2020
. 200 p.:
20 cm
Date:
2020
Availability:
Items available:
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
Cupboard 24 Shelf 118
(5),
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
(5),
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भारतीय काव्यशास्त्र एवं पाश्चात्य साहित्य-चिन्तन
by मिश्र, सभापति
Publication:
Ilahabad;
Jaybharati Prakashan,
2019
. 616 p. :
, प्रस्तुत पुस्तक ‘भारतीय काव्यशास्त्र एवं पाश्चात्य साहित्य चिन्तन’ डॉ. सभापति मिश्र द्वारा लिखित है, जो जयभारती प्रकाशन, इलाहाबाद द्वारा चतुर्थ संस्करण के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है। इस पाठ्यपुस्तक में काव्यशास्त्र प्राचीन ज्ञाशशाखा है जो अद्यतन प्रवाहित है। इस शास्त्र की एक सुंदीर्घ परम्परा रही है जिसका प्रवर्तन आचार्य भरतमुनि के 'नाट्यशास्त्र' में दृष्टिगोचर होता है। इसी प्रकार अरस्तू ने 'पोइटिक्स' में काव्यशास्त्र के सिद्धान्तों का निरूपण किया है। काव्यशास्त्र का प्रमुख उद्देश्य काव्य के तत्त्वों का विवेचन करना एवं काव्य के स्वरूप का निरूपण करना है। काव्यशास्त्र में अमिधा, लक्षणा और व्यंजना तीन शब्दशक्तियाँ मानी गयी हैं। काव्य सर्जन महाकाव्य, खण्डकाव्य, गीतिकाव्य आदि रूपों में होता है। काव्यशास्त्र के अन्तर्गत विविध काव्यभेदों के सिद्धान्त निरूपित किये गये हैं। काव्यभेदों के स्नान गद्य के भी भेद हैं। प्रस्तुत पुस्तक में भारतीय काव्यशास्त्र के साथ-साथ पाश्चात्य साहित्य-चिन्तन का विवेचन किया गया है।
320 cm
Date:
2019
Availability:
Items available:
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
(2),
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10.
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साहित्य और मानवीय संवेदना
by भोसले, सदानंद
Publication:
Kanpur;
Vikas prakashan,
2012
. 200 p. :
20 cm.
Date:
2012
Availability:
Items available:
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
(2),
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काव्यायन
काव्य संग्रह
by तळेकर, सुभाष
Publication:
Allahabad:
Jagatbharti prakashan,
2019
. 102 p. :
, Include glossary
21 cm
Date:
2019
Availability:
Items available:
(),
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
[891.431 TAL]
(2),
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मृणालिनी
by Chattarge, B.
Publication:
New Delhi:
Fingerprint,
2021
. 176 p.:
19 cm
Date:
2021
Availability:
Items available:
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
(2),
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20.
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कथाधारा
by कोमट, पोपट
Publication:
Pune:
Lilawati prakashan,
2019
. 100 p. :
21 cm
Date:
2019
Availability:
Items available:
AEF's Arihant college of Arts, Commerce and Science, Camp, Pune-01
[834 KOM]
(1),
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